एंजाइम एवं एंजाइमों का वर्गीकरण (Enzymes and Classifications of Enzymes)

Originally posted 2018-09-01 20:39:00.

आज के इस लेख में हम एंजाइम एवं एंजाइमों का वर्गीकरण (Enzymes and Classifications of Enzymes) के बारे में जानेगे।

एंजाइम (Enzymes)

ये जैविक उत्प्रेरक हैं, जो शरीर में होने वाली जैविक अभिक्रियाओं की दर में वृद्धि करते हैं, जबकि स्वयं अपरिवर्तित रहते है।

ये अभिक्रिया के लिए सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) को कम करते है, जिससे अभिक्रिया दर में वृद्धि होती है। परन्तु ये साम्यावस्था (Equilibrium) को प्रभावित नहीं करते।

एंजाइमों की संरचना (Structure of Enzymes)

सभी एंजाइम प्रोटीन के बने होते है। लेकिन  इनमें

Apoenzyme + Cofactor = Holoenzyme

सहकारक (Cofactor)

एक गैर-प्रोटीन (Nonprotein) अणु होता है। यह या तो अकार्बनिक अणु यानि धातु या छोटे कार्बनिक अणु (कोएनजाइम) हो सकता है। ये एपोएंजाइम से जुड़कर एंजाइम को क्रियाशील बनाते है।

सहकारक तीन भागों में बांट सकते है।-

  1. सहएंजाइम (Coenzymes)
  2. प्रोस्थेटिक समूह (Prosthetic group)
  3. सक्रियक (Activator)

सहएंजाइम (Coenzymes)

सहएंजाइम (Coenzymes) कार्बनिक गैर-प्रोटीन Nonprotein अणु हैं, जो एंजाइम से ढीले बंधे होते है। ये आसानी से एंजाइम से अलग होकर फिर से जुड़ सकते है।  ये ज्यादातर पानी में घुलनशील विटामिन के व्युत्पन्न (Drived) होते हैं। जैसे NAPD, NAD, FAD, Co-A, Tetrahydrofolate, Thiamine pyrophosphate

प्रोस्थेटिक समूह (Prosthetic group)

ये भी कार्बनिक गैर-प्रोटीन (Nonprotein) अणु हैं, लेकिन ये एंजाइम से दृढ़तापूर्वक (tightly) बंधे होते है। ये आसानी से एंजाइम से अलग नहीं हो सकते है।

 

सक्रियक (Activator)

ये अकार्बनिक गैर-प्रोटीन (Nonprotein) अणु हैं ये धातु आयन होते है। जो एपोएंजाइम से जुड़कर एंजाइम को क्रियाशील बनाते है।

उदाहरण के लिए Zn2+ कार्बनिक एनहाइड्रेज (Carbonic Anhydrase) और अल्कोहोल्डहाइड्रिजनेज Alcohol Dehydrogenase के लिए कॉफ़ैक्टर के रूप में कार्य करता है। तथा Fe 2+ / Fe3+ फेरेडॉक्सिन, हीमोग्लोबिन और साइटोक्रोम के लिए कॉफ़ैक्टर के रूप में कार्य करता है।

एंजाइमों के लिए सहकारक-
Enzyme Ion
Pyruvate kinase K+
Carbonic anhydrase Zn2+
Alcohol dehydrogenase Zn2+
Lactate dehydrogenase Zn2+
Glutamate dehydrogenase Zn2+
Alkaline phosphatase Zn2+
DNA polymerase Zn2+
RNA polymerase Zn2+
Delta-ALA dehydratase Zn2+
Superoxide dismutase Zn2+
Pancreatic carboxypeptidase Zn2+
Cytochrome oxidase Fe2+ / Fe3+
Catalase Fe2+ / Fe3+
Peroxidase Fe2+ / Fe3+
Hexokinase Mg2+
Glucose 6 phosphatase Mg2+
Arginase Mn2+
Ribonucleotide reductase Mn2+
Dinitrogenase Mo
Urease Ni2+
Glutathione peroxidase Se
सक्रिय स्थल (Active Site)

एंजाइमों का सक्रिय स्थल वह स्थल होता है। जहां अभिकारक (Substrate) जुड़ता है। अभिकारक (Substrate) आमतौर पर सक्रिय स्थल (Active Site) में मौजूद एमिनो अम्ल से वांडर वाल बंध, H-बंध या आयनिक बंध से बंधे होते हैं।

 

एंजाइमों के विशिष्ट गुण

  1. प्रोटीन प्रकृति (Protein Nature)

लगभग सभी एंजाइम प्रोटीन होते हैं लेकिन इनमे सहकारक के रूप में कार्बनिक, अकार्बनिक आयन भी पाए जाते है। राइबोजाइम (Ribozyme) नामक Enzyme में RNA पाया जाता है। जो

  1. कोलाइडियल प्रकृति (Colloidal Nature)

Enzymes हाइड्रोफिलिक यानि जल-स्नेही कोलोइड्स होते हैं। इनकी  कोलाइडियल प्रकृति के कारण होलोएंजाइम से सहएंजाइम को डायलिसिस द्वारा अलग कर सकते हैं।

  1. अभिकारक विशिष्टता (Substrate Specificity)

सामान्यतया एक एंजाइम केवल एक अभिक्रिया को उत्प्रेरित करता है। उदाहरण के लिए, DNA polymerase केवल पर ही कार्य करता है।

  • बंध विशिष्टता (Bond Specificity)

कुछ एंजाइम किसी विशेष प्रकार के रासायनिक बंध पर ही कार्य करते है। जैसे Ribonuclease enzyme केवल oxidase केवल L-amino acid पर काम करते है। D-amino acids पर नहीं।

  1. उत्प्रेरक गुण (Catalytic Properties)

एंजाइम(Enzyme) का आकर बड़ा होने के कारण किसी भी रासायनिक परिवर्तन के लिए थोड़ी सी मात्रा में आवश्यक होते है। वे उत्प्रेरण की शुरुआत नहीं करते हैं, लेकिन सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) को कम करके उत्प्रेरण की दर (Catalytic Rate) में तेजी लाते हैं। तथा अभिक्रिया के अंत में अपरिवर्तित रहते हैं।

एंजाइमों का वर्गीकरण (Classifications of Enzymes)

IUB (International Union of Biochemistry) के द्वारा एंजाइमों को छः वर्गों में विभाजित किया गया हैं –

ओक्सीडोरीडक्टेजेज (Oxidoreductases)

ये एंजाइम ऑक्सीकरण-अपचयन (Oxidation – Reduction) अभिक्रियाओं में भाग लेते हैं। ये हाइड्राइड आयन या हाइड्रोजन अणु का स्थानांतरण करते है।

Аअपचयन + Вऑक्सीकरण  → Аऑक्सीकरण + Вअपचयन

उदाहरण- ओक्सीडेज (Oxidases), डीहाइड्रोजिनेज (Dehydrogenases), ओक्सीजिनेज (Oxygenases), परओक्सीडेज (Peroxidases)

ट्रांसफेरेजेज (Transferases)

ये एंजाइम अभिकारकों (Substrates)  के मध्य हाइड्रोजन के अलावा फॉस्फेट, मिथाइल, एल्कोहोल, कीटोन, थायोल, एमिनो जैसे क्रियात्मक समूहों को स्थानांतरित करते है।

А-В+С→А+В-С

उदाहरण- मिथाइलट्रांसफेरेजेज (Methyltransferases), एमिनोट्रांसफेरेजेज (Aminotransferases), काइनेज (Kinases), फोस्फोराइलेज (Phosphorylases)

हाइड्रोलेजेज (Hydrolases)

ये एंजाइम अभिकारकों (Substrates) में H2O अणु को जोड़ने या निकलने का काम करते हैं। जैसे एमिलेज, कार्बोहाइड्रेज, न्यूक्लीऐज, जल के अणु को जोड़कर अभिकारक (Substrates) का अपघटन करते है। जबकि फ्युमरेज, इनोलेज, संघनन अभिक्रिया द्वारा अभिकारक (Substrate) को जोड़ते है। जिसमें जल के अणु का निष्कासन होता है।

А-В+ Н2О→ А-Н+ В-ОН

उदाहरण- फोस्फेटेज (Phosphatases), फोस्फोडाइएस्टरेज (Phosphodiesterases),  प्रोटीऐज (Proteases)

लाइसेजेज (Lyases)

ये अभिकारकों (Substrates) में बिना जल-अपघटन किये ही उनको तोड़ने का कार्य करते है।

А(ХН)-В → А-Х + В-Н

डीकार्बोक्सीलेज (Decarboxylases), एल्डोलेज (Aldolases), सिन्थेजेज (Synthases)

आइसोमेरेजेज (Isomerases)

ये एंजाइम अभिकारकों (Substrates) को उनके समावयवी में बदलने का काम करते है।

उदाहरण- रेसिमेजेज (Racemases), म्युटेजेज (Mutases)

लाइगेजेज (ligases)

ये एंजाइम अभिकारकों (Substrates) के मध्य सहसयोंजक बंध बनाकर अभिकारकों (Substrate) को जोड़ने का काम करते है।

A+B+ATP  → A-B+ADP+Pi

उदाहरण- पाइरुवेट कार्बोक्सीलेज (Pyruvate carboxylase), सिट्रेट सिन्थेटेज (Citrate synthatase)


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