कोशिका विभाजन – असुत्री, समसुत्री, तथा अर्धसुत्री

Originally posted 2017-11-16 00:32:17.

कोशिका विभाजनः-  कोशिका विभाजन वह क्रिया हैं,  जिसके द्वारा जनक

सभी कोशिकाओं में

  1. असूत्री विभाजन(Amitosis):- इस प्रकार के विभाजन में बिना तर्कु तंतुओं के निर्माण के ही सीधे केन्द्रक दो असमान भागों में बँट जाता है, उसे असूत्री विभाजन कहते हैं। ऐसा प्रोकैरियोट तथा कुछ शैवालो में होता है।
  2. समसूत्री विभाजन(Mitosis):- इस प्रकार के कोशिका विभाजन के फलस्वरूप जनक कोशिका दो गुणसूत्र संख्या वाली संतति कोशिकाओं का निर्माण करती है।

समसूत्री विभाजन की दो अवस्थायें होती हैं:-

  • केन्द्रक विभाजन
  • कोशिकाद्रव्य विभाजन

(A) केन्द्रक विभाजन(Karyokinesis):-  इस अवस्था में एक

(A.1) प्रोफेज या पूर्वावस्था(Prophase):-  इस प्रावस्था में गुणसूत्र संघनित होकर तर्कु तन्तुओं से जुडने लग जाते है तथा केन्द्रक झिल्ली एवं केन्द्रिका अदृश्य हो जाते हैं, इसे आद्यावस्था भी कहते हैं।

(A.2) मेटाफेज या मध्यावस्था(Metaphase):-  इस प्रावस्था में तर्कतंतु का निर्माण हो जाता है और गुणसूत्र मध्य पटिका पर एकत्रित हो जाते हैं।

(A.3) एनाफेज या पश्चावस्था(Anaphase):-  इस प्रावस्था में गुणसूत्र के दोनो अर्धभाग या अर्धगुणसूत्र पृथक होकर अपने-अपने ध्रुवों की ओर जाने लगते हैं।

(A.4) टिलोफेज या अंत्यावस्था(Telophase):-  इस प्रावस्था में केन्द्रक झिल्ली तथा  


 


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