गुरुबीजाणुजनन एवं भूर्णकोष

Originally posted 2020-11-16 18:07:39.

गुरुबीजाणुजनन एवं भूर्णकोष (Megasporogenesis and Embryo sac)

Contents

गुरुबीजाणुजनन (Megasporogenesis)

गुरुबीजाणुमातृ कोशिका (Megaspore Mother Cell) से गुरुबीजाणु के निर्माण की प्रक्रिया को गुरुबीजाणुजनन कहते है।
पुष्प के बनने के समय अंडाशय में पाये जाने वाले बीजाण्ड में केवल एक ही द्विगुणित (Diploid) कोशिका पायी जाती है, जिसे गुरुबीजाणुमातृ कोशिका (Megaspore Mother Cell) कहते है।
गुरुबीजाणुमातृ कोशिका में

आठ केन्द्रकों में से तीन शेष 2 केन्द्रक ध्रुवीय केन्द्रक (Polar nucleus) कहलाते है। जो मध्य में ही रहते है।
ये दोनों ध्रुवीय केन्द्रक संयुक्त होकर द्विगुणित द्वितीयक केन्द्रक (Secondary nucleus) का निर्माण करते है, जिसे संलीन केन्द्रक (Definitive nucleus) भी कहते है।


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भूर्णकोष (Embryo sac)

यह पादप का मादा युग्मकोदभिद (female gametophyte)है। जिस प्रकार भूर्णकोष में निम्न कोशिकाएँ होती हैं-

  1. अंड कोशिका (egg cell)
  2. सहाय कोशिका (synergids call)
  3. प्रतिव्यसांत कोशिका (Antipodal cell)
  4. केन्द्रिक कोशिका (Central cell)

 

अंड कोशिका (egg cell)

इसकी संख्याँ एक है। अंड कोशिका सहायक कोशिकाएँ (synergids call) तथा अंड कोशिका (egg cell) मिलकर अंड उपकरण बनाते है।

प्रतिव्यसांत कोशिका (Antipodal cell)

भूर्णकोष निभाग (Chalaza) की ओर की तीन कोशिकाएँ प्रतिव्यासंत कोशिकाएँ (Antipodal) होती है। निषेचन के बाद ये नष्ट हो जाती है।

केन्द्रिक कोशिका (Central cell)

भूर्णकोष के मध्य में दो ध्रुवीय केन्द्रक होते है। जो एक नर युग्मक से निषेचित होकर त्रिगुणित भूर्णपोष (Endosperm) का निर्माण करते है।


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